तारीख
वो भी एक तारीख थी, मैं भी एक तारीख हूं
फर्क समझिए इतना कि वो कल की तारीख थी,
और मैं आज की तारीख हूं
कल की तारीख में पूरी इतिहास दिख जाती है
और आज की तारीख में हर चीज बिक जाती है
दुकान बिक जाते हैं, मकान बिक जाते हैं
मुर्दों की बात छोड़ो,
आज की तारीख में जिंदा इंसान बिक जाते हैं
मुफ्त में यहां बुखार भी नहीं मिलता
और बीच सड़क में यहां नेताओं के ईमान बिक जाते हैं।
खबरें बिक जाती हैं, खबरनवार बिक जाते हैं
इस फैशन की तारीख में हर संस्कार बिक जाते हैं।
अपनों की दुनिया को जरा समझकर देखो
जाने पहचाने कई चेहरे बईमान दिख जाते हैं।
दौलत से बिकती हूं, और करती इनकी तारिफ हूं
वो भी एक तारीख थी और मैं भी एक तारीख हूं
फर्क समझिए इतना कि वो कल की तारीख थी,
और मैं आज की तारीख हूं
बजरंग यादव
बेलादुला खर्राघाट, रायगढ़
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